Radheshyamsingh’s 1st Doctrine for Advance Democracy in India »

केवल एक सुधार से कश्मीर के आतंकवाद, लगभग 200 जिलों में फैले नक्सलवाद, जातिवादी एव साम्प्रदायिक दंगे सहित देश की सभी राजनीतिक एवं सामाजिक समस्यायें स्वत: ही समाप्त हो जायेंगी, यह सुधार निम्नलिखित मुद्दे पर होना चाहिए।
  1. प्रधानमंत्री का चुनाव लोकसभा के आम चुनावों   के बाद सांसदों द्वारा होना चाहिए।
  2. मुख्यमंत्रियों का चुनाव विधानसभा के आम चुनावों के बाद विधायकों द्वारा होना चाहिए।
  3. मेयर, नगर महापालिका अध्यक्ष और नगरपंचायत अध्यक्ष का चुनाव शहरी निकायों में सभासदों के चुनाव के बाद खरीद-फरोख्त के बिना एक नियम के तहत सभासदों के द्वारा होना चाहिए।
  4. जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जिला पंचायत सदस्यों  के चुनाव के बाद  जिला पंचायत सदस्यों द्वारा खरीद-फरोख्त के बिना एक नियम के तहत होना चाहिए।
  5. ब्लाक प्रमुख का चुनाव बी. डी. सी. के चुनाव के बाद बी. डी. सी. द्वारा खरीद-फरोख्त के बिना एक नियम के तहत होना चहिए।
उपरोक्त सभी समस्याओं के समाधान के लिए ही Radheshyamsingh’s 1st Doctrine for Advance Democracy in Indiaनामक सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है। यह सिद्धांत अटल बिहारी वाजपेयी सरकार  द्वारा केंद्र सरकार एवं प्रदेशों के मंत्रिमंडल को सदन विशेष की कुल संख्या के 15% तक सीमित रखने के संविधान संशोधन का ही विस्तारित रूप है, जिसके अनुसार लोकसभा अथवा विधानसभाओं की कुल सदस्य़  संख्या के 15% से अधिक किसी भी परिस्थिति में मंत्री नहीं बनाये जा सकते हैं। Radheshyamsingh’s 1st Doctrine for Advance Democracy in Indiaके अनुसार केंद्र अथवा किसी प्रदेश में चाहे  पार्टीविशेष की पूर्ण बहुमत की सरकार बने अथवा गठबंधन की सरकार बने, सरकार बनाने में शामिल सभी सांसदों अथवा विधायकों में से जनरल इलेक्शन ( आम चुनाव ) में सबसे अधिक वोट प्रतिशत पाकर चुनाव जीतकर आये 15%सांसदों को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी एवं प्रदेशों के सन्दर्भ में 15%विधायकों को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाया जाये। इसके बाद चाहे पार्टीविशेष अथवा गठबंधन के शेष 85% सांसद अथवा विधायक उन 15% प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशियों के लिए वोट करें। इसके बाद 15% प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री प्रत्याशी बने जिस सांसद अथवा विधायक को 85% वोट देने वाले सांसदों अथवा विधायकों का सबसे ज्यादा वोट प्राप्त हो जाये उसे ही प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमत्री पद की शपथ दिलाना चाहिए।  यहाँ पुनः मै स्पस्ट कर दू की आम चुनाव में सबसे अधिक वोट प्रतिसत पाकर चुनाव जीते हो नाकि सबसे ज्यादा वोट पाकर | उदाहरण स्वरूप बी. जे. पी. के 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 282 सांसद चुनकर आये थे तो इस स्थिति में प्रधानमंत्री पद हेतु बी. जे. पी. के 282 सांसदों का 15% अर्थात् 42 भाजपा के वे सांसद जो सबसे अधिक मत प्रतिशत पाकर चुनाव जीते हों, वे प्रधानमंत्री पद के चुनाव हेतु प्रत्याशी बने। इसके बाद प्रधानमंत्री पद के बी. जे. पी. के सबसे अधिक वोट प्रतिशत पाकर जनरल इलेक्शन जीते इन 15% सांसदों के लिए 282 – 42 = 240 बी. जे. पी. के सांसद वोट करें। प्रधानमंत्री पद के  इन 42 सांसदों में से जिस सांसद को सबसे ज्यादा बी. जे. पी. के शेष 240 सासंदों का वोट मिले, उसे प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई जानी चाहिए थी। वर्तमान समय में प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्रियों के चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से अलोकतांत्रिक, असंसदीय, स्वछंदतापूर्ण और पार्टियों का हितसाधक तथा देश के लोकतांत्रिक भावना तहस-नहस करने  वाला है। ठीक इसी तरह से मेयर, नगर महापालिका अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष, जिला  पंचायत अध्यक्ष एवं ब्लाक प्रमुख का चुनाव होना चाहिए। यदि नगरीय अथवा ग्रामीण स्थानीय निकाय के किसी भी सदन विशेष के चुनाव पार्टीआधार पर न हो, तो वहां सदनविशेष के सबसे अधिक वोट प्रतिशत पाकर चुनाव जीते 15% सदस्यों के लिए शेष 85% उस सदन विशेष के सदस्य वोट करें और 15% प्रत्याशी में से जिस प्रत्याशी को 85% वोट देने वाले शेष सदस्यों का वोट मिल जाये, उसे मेयर, नगर महापालिका अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष, जिला  पंचायत अध्यक्ष एवं ब्लाक प्रमुख बनाया जाना चाहिए। इससे व्यक्तिवाद, परिवारवाद, जातिवाद, सम्प्रदायवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, धनबल और बाहुबल की राजनीति भारतीय लोकतंत्र से तुरन्त ही गायब हो जायेगी। जिससे भारतीय राजनीति में वोटबैंक के आधार पर नहीं, बल्कि रचनात्मक एवम सकारात्मक कार्यों के आधार पर मतदाताओं से वोट मांगना   चुनाव जीतने का एकमात्र विकल्प होगा। अत: Radheshyamsingh’s 1st doctrine for advance democracy in India में भारत की कोई भी राजनीतिक समस्या रख दो, स्वत: ही समाधान मिल जायेगा। यहां तक कि भारत के किसी भी कोने में एक भी जातिवादी एवं साम्प्रदायिक दंगा कभी भी नहीं होगा। व्यक्तिगत झगड़े तो हो सकते हैं लेकिन उस व्यक्तिगत झगड़े को बढ़ाने में अन्य व्यक्ति एवं समाज शामिल नहीं होगा। आज नेता ध्रुवीकरण करके वोटबैंक की  राजनीति के लिए छोटी-छोटी घटनाओं में आग में घी डालने में लगे रहते हैं। लेकिन Radheshyamsingh’s 1st Doctrine for Advance Democracy in India के भारतीय लोकतंत्र में लागू होने के बाद हर जाति एवं धर्म के एक-एक मतदाता को जोड़ने में सभी राजनीतिज्ञ एवं राजनीतिक पार्टियाँ जी-जान से प्रयास करेंगी। अत: अभी जो सांसद से लेकर सभासद तक के प्रत्याशी चुनाव जीतने भर के लिए वोट जुगाड़ने के लिए मतदाताओं के ध्रुवीकरण एवं जोड़-तोड़ में लगे रहते हैं। Radheshyamsingh’s 1st Doctrine for Advance Democracy in India लागू होने के बाद सांसद से लेकर सभासद तक के प्रत्याशी चुनाव जीतने मात्र के लिए नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मेयर, नगर महापालिका अध्यक्ष, नगरपंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष एवं ब्लाक प्रमुख प्रत्याशी बनने के लिए अपने क्षेत्र के अधिक से अधिक मतदाताओं का वोट पाना चाहेगा। इससे पूरे भारत की राजनीति में सकारात्मकता एवं रचनात्मकता की लहर दौड़ जायेगी, जिससे कि भारतीय लोकतंत्र में  विघटनकारी राजनीति की जगह भाईचारे एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की राजनीति शुरू हो जायेगी।

                                                            धन्यवाद

                                                           राधेश्याम सिंह